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आस्था

भगवान विष्णु के चरणों का महत्व

भगवान विष्णु के चरणों का महत्वकिसी ने सही ही कहा है कि भगवान के पांव में स्वर्ग होता है। उनके चरणों जैसी पवित्र जगह और कोई नहीं है। इसलिए तो लोग भगवान के चरणों का स्पर्श पाकर अपने जीवन को सफल बनाने

धन एवं धर्म

धन एवं धर्म ☀️धन और धर्म दोनों का मनुष्य जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मनुष्य की चाल केवल धन से ही नहीं बदलती अपितु धर्म से भी बदल जाती है। जब धन होता है तो अकड़ कर चलता है और जब धर्म होता है तो

भगवान शिव को जाने बिना इस लोक को जानना असंभव:शंकराचार्य नरेंद्रानंद

भगवान शिव को जाने बिना इस लोक को जानना असंभव:शंकराचार्य नरेंद्रानंद जहां भी सत्य है, वहीं शिव का वास है। शिव के साथ सारी विषमता है उषा काल में शिव और पार्वती विज्ञान के धरातल पर काल

मोहिनी एकादशी पर क्या करे जिससे मिलेगा लाभ

मोहिनी एकादशी पर क्या करे जिससे मिलेगा लाभक्या महत्व मोहिनी एकादशी कामोहिनी एकादशी पर क्या ना करे जिससे हो सकता है नुकसान मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं।

ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद महाराज की स्मृति में हवन – यज्ञ का आयोजन

ब्रह्मलीन स्वामी प्रेमानंद महाराज की स्मृति में हवन - यज्ञ का आयोजनगांव जट शाहपुर आश्रम परिसर में पहुंचे अनेक श्रद्धालु और ग्रामींणस्वामी प्रेमानंद महाराज ने एमएलए शिक्षण संस्थान की स्थापना कीस्वामी

चारों धामों की यात्रा का धार्मिक महत्त्व क्यों?

चारों धामों की यात्रा का धार्मिक महत्त्व क्यों?जिस प्रकार हिन्दू संस्कृति के चार वेद हैं, चार वर्ण हैं, चार दिशाएं हैं, ठीक उसी प्रकार चार धाम हैं।🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁भारत की पवित्र भूमि में▪ पूर्व में

हनुमानजी को जल्दी प्रसन्न करना हो पूजा करके उन्हें यह चढ़ा सकते हैं।

हनुमानजी की पूजा अलग-अलग तरीके से की जाती है। लेकिन भक्त को तो किसी भी तरीके से कोई मतलब नहीं और भक्त लाभ की चिंता नहीं करता है। हनुमानजी का नाम ही उसके लिए मंत्र, चालीसा और पूजा है। फिर भी

सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है हनुमान चालीसा का पाठ

सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है हनुमान चालीसा का पाठ〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ♦️♦️हनुमान जी और हनुमानचालीसा दोनो का भारतीय संस्कृति में अवर्णीय आस्था है। हनुमान जी का नाम आते ही

“सीता नवमी”

. "सीता नवमी" वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को सीता नवमी कहते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की

काशी विश्वनाथ मंदिर के अविश्वनीय और अकल्पनीय ग्यारह सच बतायेगें।

आज हम आपको काशी विश्वनाथ मंदिर के अविश्वनीय और अकल्पनीय ग्यारह सच बतायेगें।मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खान अघ हानि कर।जहँ बस संभु भवानि सो कासी सेइअ कस न ॥ भावार्थ:-जहाँ श्री शिव-पार्वती बसते हैं,