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सडांध भरे कचरे से स्कूली बच्चों की तबियत बिगड़ी सरकार बेफिक्र : माईकल सैनी (आप)

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सडांध भरे कचरे से स्कूली बच्चों की तबियत बिगड़ी सरकार बेफिक्र : माईकल सैनी (आप)

*महीनों से पड़े कचरे से निकल रही जहरीली गैस बनी मासूमों के लिए आफत, *गुरुग्राम शहर में हालात बेकाबू कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा प्रशासन नाकाम,

प्रधान संपादक योगेश

गुरुग्राम ! स्मार्टसिटी गुरुग्राम में चल रहे कचरा फसाद से स्थानीय नागरिक त्राहिमाम कर रहे हैं नोबत अब स्कूली बच्चों की जान पर बन आयी है , ताज़ा मामला राजीव नगर कॉलोनी स्थित एक निजी स्कूल गेट पर महीनों से पड़े कचरे के सड़ने से उसमें जहरीली गैस बनने के कारण बच्चों के गले व आँखों में जलन होने की शिकायतें तो बच्चे अपने अभिभावकों को पिछले कई दिनों बता रहे थे मगर बीते बुधवार अचानक कई बच्चों को उल्टियां आने व सांस लेने में दिक्कतें आने लगी जिन्हें तुरन्त उनके परिजनों ने स्कूल से लेजाकर प्राथमिक उपचार दिलाया ! माईकल सैनी आम आदमी पार्टी जिला मीडिया प्रभारी ने बताया कि शहर के हालात अब बेकाबू हो चले हैं ऐसे में चिंता बच्चों के स्वास्थ्य की हो रही है, उनको प्रदूषित वातावरण से मुक्ति कौन दिलाएगा और जबतल्क मसला हल नहीं होता है तबतल्क बच्चों की शिक्षा का क्या होगा , जिसका पहले कोरोना काल में ही बहुत नुकसान हो चुका है तो क्या उनको अभी भी स्कूल ना भेजें अभिभावक सवाल यह है ? माईकल सैनी ने कहा कि स्वच्छता के पैमाने पर खरा उतरने व उस अंकतालिका में अव्वल आने वाली बात तो भूलनी ही होगी भले सैंकड़ों करोड़ स्वाहा क्यों न कर दिए गए हो चूँकि जबतल्क यह निकम्मे,नकारा और भ्रष्ट अधिकारी यहाँ जमावड़ा लगाए है तबतल्क तो ऐसी अपेक्षा करना भी बेमायने होगी ! भाजपा ने खूब चलाया स्वच्छता पखवाड़ा परन्तु बात करें स्वच्छता सर्वेक्षण श्रेणी की तो आज के हालातों के मद्देनजर तो स्वच्छ शहरों की बजाय सबसे प्रदूषित शहरों में होने लगी है गिनती दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा शासनकाल में गुरुग्राम को कचराग्राम भी कहां जाने लगा है और यह हाल तो तब है जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रमुख अभियानों में से एक अभियान है “स्वच्छ भारत मिशन परन्तु दुर्भाग्य से इसकी धज्जियाँ स्वम् खट्टर सरकार व उसके अधिकारीगण ही उड़ा रहे हैं ! मीडिया प्रभारी माईकल सैनी ने कहा कि अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच बढ़ते गतिरोध का समाधान शीघ्र होता नजर नहीं आ रहा है उनके मध्य वार्ता का नहीं होना भी शहर की बिगड़ती स्तिथियों के लिए जिम्मेदार है आवश्यकता मध्यस्थता की है परन्तु दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि शहर कुशल नेतृत्व विहीन हो गया है जिस कारण ही आज यह हालात बने हुए हैं , जनता ने खूब धैर्य निभाया इस उम्मीद में कि शीघ्र कोई समाधान निकाल लिया जाएगा लेकिन जनता के सब्र का बांध भी अब टूटने लगा है !

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