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आस्था

दशमी को जलागमन : एकादशी को जलाभाव

दशमी को जलागमन : एकादशी को जलाभाव जेठमेंजल जेठ मास जल के महत्व को कई रूपों में समझने की प्रेरणा लिए आता है। अव्वल तो यही महीना काल के सुकाल और दुष्काल रूप को दिखाता था। मैं तो इसे पूर्ति और

निर्जला एकादशी

निर्जला एकादशी निर्जला एकादशी व्रत सभी एकादशी में सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है। इस वर्ष इसकी दो तिथि मानी जा रही है। वास्तव में एकादशी तिथि 10 जून को शुक्रवार की प्रातः सात बजकर पच्चीस मिनट से

माया और योगमाया में क्या अंतर है

माया और योगमाया में क्या अंतर है सबसे पहले यह समझ लीजिए कि माया और योगमाया यह दोनों भगवान की शक्ति है। जैसा की हम जानते हैं कि शक्ति और शक्तिमान से पृथक नहीं हो सकती। उदाहरण से समझिए आग और आग में

भगवान शिव ने पार्वती को बताए थे जीवन के ये पाँच रहस्य!

भगवान शिव ने पार्वती को बताए थे जीवन के ये पाँच रहस्य! भगवान शिव ने देवी पार्वती को समय-समय पर कई ज्ञान की बातें बताई हैं। जिनमें मनुष्य के सामाजिक जीवन से लेकर पारिवारिक और वैवाहिक जीवन की बातें

मोक्षदायिनी सप्तपुरियां कौन कौन सी हैं?

मोक्षदायिनी सप्तपुरियां कौन कौन सी हैं?सप्तपुरी पुराणों में वर्णित सात मोक्षदायिका पुरियों को कहा गया है। इन पुरियों में 'काशी', 'कांची' (कांचीपुरम), 'माया' (हरिद्वार), 'अयोध्या', 'द्वारका', 'मथुरा'

गीता की सौगंध क्यूं दी जाती है

गीता की सौगंध क्यूं दी जाती है ""भगवान ने लक्ष्मीदेवी को सुशर्मा की कथा सुनाई"" सुशर्मा एक घोर पापी व्यक्ति था. वह हमेशा भोग-विलास में डूबा रहता. मदिरा और मांसाहार इसी में जीवन बिताता. एक दिन

सीताजी को किसके शाप के कारण श्रीराम का वियोग सहना पड़ा ?

सीताजी को किसके शाप के कारण श्रीराम का वियोग सहना पड़ा ? प्राचीनकाल में मिथिला में सीरध्वज जनक नाम से प्रसिद्ध धर्मात्मा राजा राज्य करते थे । एक बार राजा जनक यज्ञ के लिए पृथ्वी जोत रहे थे । उस समय

ॐ त्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर हैं

ॐ त्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर हैंजो महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं।उन तैंतीस देवताओं में 8 वसु 11 रुद्र और 12 आदित्यठ 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं।इन तैंतीस देवताओं की सम्पूर्ण

वास्तु के अनुसार घर में फर्नीचर

वास्तु के अनुसार घर में फर्नीचर पं वेद प्रकाश तिवारी ज्योतिष एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ घर की सजावट में फर्निचर का बहुत महत्व है। आजकल हम फर्निचर पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। कई बार ऐसा होता है कि अगर

गुरुओं का मार्गदर्शन, सन्तों की संगति से जीव का कल्याण: शंकराचार्य नरेंद्रानन्द

गुरुओं का मार्गदर्शन, सन्तों की संगति से जीव का कल्याण: शंकराचार्य नरेंद्रानन्दब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी शंकरानंद सरस्वती का 31वाँ निर्माण महोत्सवब्रह्मलीन शंकराचार्य शंकरानंद सनातन की